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पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की पथरी कà¥à¤¯à¤¾ होता है (What is Gall Bladder Stone)
पाचन के लिठआवशà¥à¤¯à¤• à¤à¤‚जाइम को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने वाले महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ अंग यानी पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ (pittashay)से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ सबसे पà¥à¤°à¤®à¥à¤– समसà¥à¤¯à¤¾ यह कि इसमें सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ बनने की आशंका बहà¥à¤¤ अधिक होती है, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गॉलसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ कहा जाता है। दरअसल जब गॉलबà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में तरल पदारà¥à¤¥ की मातà¥à¤°à¤¾ सूखने लगती है तो उसमें मौजूद चीनी-नमक और अनà¥à¤¯ माइकà¥à¤°à¥‹à¤¨à¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤à¤Ÿ ततà¥à¤µ à¤à¤• साथ जमा होकर छोटे-छोटे पतà¥à¤¥à¤° के टà¥à¤•ड़ों जैसा रूप धारण कर लेते हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गॉलसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥à¤¸ कहा जाता है।
कà¤à¥€-कà¤à¥€ पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ में कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤², बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ और पितà¥à¤¤ लवणों का जमाव हो जाता है। 80 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पथरी कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤² की बनी होती (गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨) है। धीरे-धीरे वे कठोर हो जाती हैं तथा पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ (pittashay)के अंदर पतà¥à¤¥à¤° का रूप ले लेती है। कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ पीले-हरे रंग के होते हैं।
जब बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में बà¥à¤²à¥ˆà¤• या बà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨ कलर के सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥à¤¸ नजर आते हैं तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पिगमेंट सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥à¤¸ कहा जाता है। कई बार गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में अनकॉनà¥à¤œà¥à¤—ेटेड बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ नामक ततà¥à¤µ का संगà¥à¤°à¤¹ होने लगता है तो इससे पिगमेंट सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है। गॉलबà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में गड़बड़ी की वजह से कई बार पितà¥à¤¤ बाइल डकà¥à¤Ÿ में जमा होने लगता है, इससे लोगों को जॉनà¥à¤¡à¤¿à¤¸ à¤à¥€ हो सकता है। अगर आंतों में जाने के बजाय बाइल पैनकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤œà¤¼ में चला जाठतो इससे कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• पैनकà¥à¤°à¤¿à¤à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ नामक गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। अगर सही समय पर उपचार (pit ki pathri ka ilaj) न कराया जाठतो इससे गॉलबà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में कैंसर à¤à¥€ हो सकता है।
पितà¥à¤¤ में पथरी का बनना à¤à¤• à¤à¤¯à¤‚कर पीड़ादायक रोग है। पितà¥à¤¤ में कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² और पिगà¥à¤®à¥‡à¤‚ट नामक दो तरह की बनती है। लेकिन लगà¤à¤— 80 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पथरी कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² से ही बनती है। पितà¥à¤¤ लिवर में बनता है और इसका संगà¥à¤°à¤¹ गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में होता है। यह पितà¥à¤¤ फैट यà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ को पचाने में मदद करता है। लेकिन जब पितà¥à¤¤ में कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² और बिलरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाती है, तो पथरी का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होता है।
गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है (Causes of Gall Bladder Stone)
पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ (pittashay)में पथरी का अà¤à¥€ तक कोई कारण सिदà¥à¤§ नहीं हà¥à¤† है और यह किसी à¤à¥€ उमà¥à¤° में हो सकता है। कà¥à¤› फैकà¥à¤Ÿà¤° हैं जो गॉलसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥à¤¸ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को बढ़ा सकते हैं जैसे कि-
-मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ या डायबिटीज (Diabetes)
-मोटापा (Obesity)
-गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ (Pregnancy)
-मोटापे की सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद (Post bariatric surgery)
-कà¥à¤› दवाओं का सेवन
-लंबे समय से किसी बीमारी के गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ होने के कारण
इसके सिवा और à¤à¥€ कारण होते हैं-
बà¥à¤°à¥‡à¤¡, रसà¥à¤• और अनà¥à¤¯ बेकरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦- बेकरी में बने उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ जैसे- बà¥à¤°à¥‡à¤¡, मफिनà¥à¤¸, कà¥à¤•ीज, कप केक आदि का सेवन पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ (pittashay)के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। दरअसल इन फूडà¥à¤¸ में सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ और टà¥à¤°à¤¾à¤‚स फैट की मातà¥à¤°à¤¾ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है और इनमें से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° फूडà¥à¤¸ मैदे से बने होते हैं। अगर आपको गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° से संबंधित कोई रोग है, तो इन उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का सेवन बिलà¥à¤•à¥à¤² नहीं करना चाहिà¤à¥¤ इसकी जगह पर आप मोटे अनाज से बने आहारों का सेवन करें।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¥€ है खतरनाक-अगर आपको अपने गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखना है, तो जानवरों में पाये जाने वाले पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ मातà¥à¤°à¤¾ सीमित कर देनी चाहिà¤à¥¤ दरअसल जानवरों में पाठजाने वाले पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ और यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ के होने का खतरा बढ़ जाता है। मछली, मांस में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के साथ कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक होती है, इसलिठइनका सेवन बहà¥à¤¤ अधिक नहीं करें। अगर आपको गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ या किडनी में पथरी है, तब तो इनका सेवन बिलà¥à¤•à¥à¤² नहीं करना चाहिà¤à¥¤
मीठी चीजों का सेवन-मीठी चीजों में रिफाइंड कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ काफी मातà¥à¤°à¤¾ में पाया जाता है। इसके साथ ही चीनी के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन से कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² गाढ़ा होता है, जिससे दिल के रोगों के साथ-साथ गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में पथरी का खतरा à¤à¥€ बढ़ जाता है। इसलिठमीठी चीजों का बहà¥à¤¤ अधिक सेवन नहीं करना चाहिà¤à¥¤
गरà¥à¤à¤¨à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• दवाà¤à¤ -जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में या जलà¥à¤¦à¥€-जलà¥à¤¦à¥€ गरà¥à¤à¤¨à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• दवाओं का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करने वाली महिलाओं में à¤à¥€ गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° की समसà¥à¤¯à¤¾ काफी पाई जाती है। इसलिठमहिलाओं को चाहिठकि दवाओं के बजाय अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार के गरà¥à¤à¤¨à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• उपायों को अपनाà¤à¤‚, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि दवाओं का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में पथरी का मरीज बना सकता है। इसके अलावा इन दवाओं का किडनी और लीवर पर à¤à¥€ बà¥à¤°à¤¾ असर पड़ता है।
कॉफी-अगर आप कॉफी का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन करते हैं, तो à¤à¥€ आपको गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° की समसà¥à¤¯à¤¾ का सामना करना पड़ सकता है। इसलिठजिन लोगों को गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में पहले ही पथरी या अनà¥à¤¯ कोई शिकायत है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कॉफी का सेवन बिलà¥à¤•à¥à¤² बंद कर देना चाहिà¤à¥¤ जो लोग सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हैं, वो दिन में à¤à¤• या दो कॉफी पी सकते हैं मगर इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिà¤à¥¤
सोडा का सेवन-पथरी होने पर पानी का अधिक सेवन करने की सलाह दी जाती है, लेकिन कà¥à¤› पेय पदारà¥à¤¥ à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ होते हैं जो पथरी होने पर नहीं पीना चाहिà¤à¥¤ सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ होने पर सोडा का सेवन बिलà¥à¤•à¥à¤² नहीं करना चाहिà¤, इसमें फॉसà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ के खतरे को बढ़ाता है।
पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ में पथरी होने के लकà¥à¤·à¤£ (Symptoms of Gall Bladder Stone)
Gallbladder stone symptoms
कई बार पितà¥à¤¤ की थैली में पथरी बिना किसी लकà¥à¤·à¤£ के होती है और कई बार कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ à¤à¥€ होती है। पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की पथरी के लकà¥à¤·à¤£ जो कà¥à¤› खास नजर में आते हैं वह हैं-
-बदहजमी
-खटà¥à¤Ÿà¥€ डकार
-पेट फà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¾
-à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€
-पेट में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨
-उलà¥à¤Ÿà¥€
-पसीना आना जैसे लकà¥à¤·à¤£ नजर आते हैं।
पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ में पथरी होने से कैसे बचा जा सकता है (Prevention of Gall Bladder Stone)
पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ (pittashay)में पथरी से बचने के लिठजीवनशैली और आहार में बदलाव लाना आवशà¥à¤¯à¤• होता है। चलिये जानते हैं कि पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ में पथरी होने पर पितà¥à¤¤ की पथरी में कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिठ–
आहार
–गाजर और ककड़ी का रस को 100 मि.ली. की मातà¥à¤°à¤¾ में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पितà¥à¤¤ की पथरी में लाठहोता है।
-सà¥à¤¬à¤¹ खाली पेट 50 मि.ली. नींबू का रस पीने से à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में लाठहोता है।
-शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा शकà¥à¤•र यà¥à¤•à¥à¤¤ पेय हानिकारक है। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।
-नाशपाती पितà¥à¤¤ की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाये जाने वाले रासायनिक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ (pittashay)के रोग दूर होते हैं।
-विटामिन-सी अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ à¤à¤¸à¥à¤•ोरà¥à¤¬à¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से शरीर की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ मजबूत बनती है। यह कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² को पितà¥à¤¤ में बदल देता है। इसकी तीन से चार गोली रोज लेने पर पथरी में लाठहोता है।
-पितà¥à¤¤ पथरी (gallbladder stone in hindi) के रोगी à¤à¥‹à¤œà¤¨ में अधिक से अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और फल लें। इनमें कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² कम मातà¥à¤°à¤¾ में होता है और पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की जरूरत à¤à¥€ पूरी करते हैं।
-तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ ही करें।
-खटà¥à¤Ÿà¥‡ फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन-सी गॉलबà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° की पथरी दूर करने के लिठकाफी मददगार साबित होता है।
-रोजाना à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š हलà¥à¤¦à¥€ का सेवन करने से पथरी दूर होती है।
खाने से परहेज करनी चाहिà¤-
-पितà¥à¤¤ की पथरी (gallbladder stone in hindi)होने पर चिकितà¥à¤¸à¤•ों ने आहार से अणà¥à¤¡à¥‹à¤‚ को हटाने का सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया है। उनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इसमें काफी कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² होता है जो पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ (pittashay)में पथरी का कारण बनता है।
-यदि आपको तली हà¥à¤ˆ चीजें खाना पसंद है तो उसे तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ छोड़ दीजिà¤à¥¤ यह न केवल सेहत को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाते हैं बलà¥à¤•ि इससे पितà¥à¤¤ की पथरी की समसà¥à¤¯à¤¾ और à¤à¥€ बढ़ सकती है। इसलिठआप कोशिश करें कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तली हà¥à¤ˆ चीजें न खाà¤à¤‚। आपको बता दें कि तली हà¥à¤ˆ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ में हाइडà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨à¥€à¤•ृत वसा, टà¥à¤°à¤¾à¤‚स वसा और सेचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ वसा होती है जो आपकी पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ (gallbladder stone in hindi)के दरà¥à¤¦ को बढ़ा सकता है। तलने के लिठसà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकलà¥à¤ª के रूप में आप जैतून या कैनोला तेल का उपयोग करें।
-पितà¥à¤¤ की पथरी में परहेज की बात करें तो आपको मांसाहारी से à¤à¥€ परहेज करना चाहिठजैसे, मीट, लाल मांस, सूअर का मांस और चिकन आदि। इसके अलावा आप तैलीय मदली à¤à¥€ न खाà¤à¤‚।
-पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤¡ फूड के पीछे लोग कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤¾à¤— रहें हैं इसकी à¤à¤• वजह यह à¤à¥€ है कि ये खाने में अचà¥à¤›à¥‡ लगते हैं और इसे बनाने के लिठजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मेहनत à¤à¥€ नहीं करनी पड़ती। लेकिन इसका सà¥à¤µà¤¾à¤¦ हमारे शरीर को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकता है। यह न केवल शरीर के पाचन तंतà¥à¤° को खराब कर सकता है बलà¥à¤•ि पितà¥à¤¤ की पथरी की समसà¥à¤¯à¤¾ को à¤à¥€ बढ़ा सकता है। आमतौर पर टà¥à¤°à¤¾à¤‚स फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡, पैकेजà¥à¤¡ फूड में मौजूद होते हैं जो पितà¥à¤¤ की पथरी के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को बढ़ाने का काम करते हैं। आप चिपà¥à¤¸, कà¥à¤•ीज, डोनटà¥à¤¸, मिठाई या मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ पैक वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से बचें।
-पितà¥à¤¤ की पथरी होने पर आप परिषà¥à¤•ृत अवयव वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ से दूरी बनाà¤à¤‚। वà¥à¤¹à¤¾à¤‡à¤Ÿ बà¥à¤°à¥‡à¤¡, परिषà¥à¤•ृत आटा पासà¥à¤¤à¤¾, सफेद चावल और परिषà¥à¤•ृत चीनी ये सà¤à¥€ चीजें फैट का रूप ले लेती है, जो पितà¥à¤¤ में कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² में वृदà¥à¤§à¤¿ कर सकती है।
-पितà¥à¤¤ की पथरी (gallbladder stone in hindi) की समसà¥à¤¯à¤¾ है तो आप वसा वाले डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का सेवन मत कीजिà¤à¥¤ दूध, पनीर, दही, आइसकà¥à¤°à¥€à¤®, à¤à¤¾à¤°à¥€ कà¥à¤°à¥€à¤® और खटà¥à¤Ÿà¤¾ कà¥à¤°à¥€à¤® में उचà¥à¤š सà¥à¤¤à¤° के फैट होते हैं, जो पितà¥à¤¤ की पथरी को बढ़ाने का काम करते हैं। अपने आहार में डेयरी की मातà¥à¤°à¤¾ कम करने की कोशिश करें या कम वसा वाले दूध को चà¥à¤¨à¥‡à¤‚।
-पितà¥à¤¤ की पथरी में परहेज के लिठया आपको अपने पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की थैली की रकà¥à¤·à¤¾ करने के लिठकà¥à¤› खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से बचना चाहिà¤à¥¤ सबसे बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ उचà¥à¤š वसा वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ और पà¥à¤°à¤¸à¤‚सà¥à¤•ृत खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ से हैं। इसलिठइनसे दूरी बनाकर रखें। खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ जैसे वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेल और मूंगफली का तेल चिकना या तला हà¥à¤† होता है, इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ छोड़ना अधिक मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है और इससे पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की थैली की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤¡ या वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¤¿à¤• रूप से बेकà¥à¤¡ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ की तरह टà¥à¤°à¤¾à¤‚स वसा वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥, पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की थैली के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को à¤à¥€ नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकते हैं। सफेद पासà¥à¤¤à¤¾, बà¥à¤°à¥‡à¤¡ और शà¥à¤—र जैसे परिषà¥à¤•ृत सफेद खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से बचें, ये आपके पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की थैली को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकते हैं। आपको शराब और तंबाकू से à¤à¥€ बचना चाहिà¤à¥¤
-पितà¥à¤¤ की पथरी (gallbladder stone in hindi) में अमà¥à¤²à¥€à¤¯ फूड नहीं खाना चाहिà¤à¥¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ जो अमà¥à¤²à¥€à¤¯ होते हैं, जैसे कि खटà¥à¤Ÿà¥‡ फल, कॉफी और टमाटर सॉस न केवल आपके पेट के लिठजलन पैदा कर सकते हैं बलà¥à¤•ि इससे आपको पितà¥à¤¤ की पथरी à¤à¥€ हो सकती है।
खाना चाहिà¤-
-फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की अधिक मातà¥à¤°à¤¾à¥¤
-सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤š यà¥à¤•à¥à¤¤ कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ की अधिक मातà¥à¤°à¤¾à¥¤ उदाहरण के लिठबà¥à¤°à¥‡à¤¡, चावल, दालें, पासà¥à¤¤à¤¾, आलू, चपाती और पà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥à¤Ÿà¥‡à¤¨ (केले जैसा आहार)। जब समà¥à¤à¤µ हो तब साबà¥à¤¤ अनाजों से बनी वसà¥à¤¤à¥à¤à¤‚ लें।
-थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में दूध और डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ लें। कम फैट वाले डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ लें।
-कà¥à¤› मातà¥à¤°à¤¾ में मांस, मछली,अणà¥à¤¡à¥‡ और इनके विकलà¥à¤ª जैसे फलियाठऔर दालें।
-वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेलों जैसे सूरजमà¥à¤–ी, रेपसीड और जैतून का तेल, à¤à¤µà¥‹à¤•ाडो, मेवों और गिरियों में पाठजाने वाली असंतृपà¥à¤¤ वसा।
-रेशे की अधिकता से यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार गà¥à¤°à¤¹à¤£ करें। यह फलियों, दालों, फलों और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, जई और होलवीट उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ जैसे बà¥à¤°à¥‡à¤¡, पासà¥à¤¤à¤¾ और चावल में पाया जाता है।
-तरल पदारà¥à¤¥ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में लें, जैसे कि पानी या औषधीय चाय आदि का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ कम से कम दो लीटर सेवन करें।
जीवनशैली-
योग और वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤®-नियमित वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® रकà¥à¤¤ ऊतकों में कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² को घटाता है, जो कि पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की समसà¥à¤¯à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ कर सकता है। पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ तीस मिनट तक, सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में पांच बार, अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत मधà¥à¤¯à¤® मातà¥à¤°à¤¾ की शारीरिक सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾, वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की पथरी के उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने के खतरे पर अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ होती है।
योग-पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की पथरी के उपचार के लिठजिन योगासनों का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करना चाहिà¤, वह हैं-
-सरà¥à¤µà¤¾à¤‚गासन
-शलà¤à¤¾à¤¸à¤¨
-धनà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¨
-à¤à¥à¤œà¤‚गासन
पथरी निकालने के बाद कौन-सी बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिठ(Prevention after removing Gall Bladder Stone)
-सरà¥à¤œà¤°à¥€ के पहले पांच घणà¥à¤Ÿà¥‡ पीने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ नहीं है। फिर आप पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 0.5 लीटर तक, हर 20 मिनट में गैर-कारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ पेयजल के à¤à¤•-दो सिप पी सकते हैं। ऑपरेशन के à¤à¤• दिन बाद, आप कॉफी, चाय, मीठे और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ पेय, अलà¥à¤•ोहल को छोड़कर, सामानà¥à¤¯ पेय वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ जारी रख सकते हैं।
-आहार पर तीन दिनों से पानी पर गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ पॉरेज, मैश किठहà¥à¤ आलू, कम वसा वाले योग, कम वसा वाले कॉटेज पनीर, बेकà¥à¤¡ गà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤‚ड गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤¡ सेब के रूप में उबले हà¥à¤ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ शामिल हैं। पांचवे दिन, आप बिना किसी मांस के शोरबा में जरà¥à¤¦à¥€, मैश किठहà¥à¤ सूप के बिना उबले हà¥à¤ आमलेट को खाना शà¥à¤°à¥ कर सकते हैं, आप उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® सफेद रोटी कà¥à¤°à¥‚टोंस जोड़ सकते हैं। पहले सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के अंत तक, उबला हà¥à¤† मछली और जमीन के रूप में कम वसा वाले किसà¥à¤®à¥‹à¤‚ का मांस, दूध के साथ तरल अनाज, मैश किठहà¥à¤ केले की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ है।
-इसके अलावा, पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की थैली हटाने के बाद, परहेज डेढ़ महीने तक जारी रहता है। इसका मà¥à¤–à¥à¤¯ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त यह है कि वà¥à¤¯à¤‚जनों को उबला हà¥à¤† या उबला जाना चाहिà¤, छोटे हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में à¤à¥‹à¤œà¤¨, दिन में पांच-छ बार खाने की आवृतà¥à¤¤à¤¿à¥¤ सà¤à¥€ धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚, मसालेदार उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦, मसालेदार और डिबà¥à¤¬à¤¾à¤¬à¤‚द खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को बाहर रखा गया है।
-डेढ़ महीनों के बाद, आप धीरे-धीरे चिकन जरà¥à¤¦à¥€/सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में à¤à¤• बार, उबला हà¥à¤† सॉसेज, शहद, हलà¥à¤•े पनीर, ताजा खटà¥à¤Ÿà¤¾ कà¥à¤°à¥€à¤®, ताजे फल और जामà¥à¤¨ का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ ले सकते हैं। चीनी के बजाय, सà¥à¤µà¥€à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ का उपयोग करना बेहतर होता है। इस आहार को तालिका à¤à¤¨ 5/हेपेटिक/कहा जाता है और इसे तीन महीने का पालन करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होगी। à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में, गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टरोलॉजिसà¥à¤Ÿ की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ के साथ, आहार धीरे-धीरे विसà¥à¤¤à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ होता है, लेकिन फिर à¤à¥€ मांस, मसालेदार और डिबà¥à¤¬à¤¾à¤¬à¤‚द वà¥à¤¯à¤‚जनों को धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ किया जाता है, मसालेदार उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ को तà¥à¤¯à¤¾à¤— दिया जाना चाहिà¤à¥¤ यकृत के पितà¥à¤¤ कारà¥à¤¯ को बेहतर बनाने के लिà¤, सबà¥à¤œà¥€ फाइबर का उपयोग करना आवशà¥à¤¯à¤• होता है। कचà¥à¤šà¥€ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और फल, वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेल उपयोगी होते हैं। शराब बाहर रखा गया है।
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